जालंधर में पिता जिस बेटी की लाश कंधे पर उठा लेकर गया उसे नहीं था कोरोना



डीसी घनश्याम थोरी ने करवाई मामले की जांच, डीपीआरओ जालंधर के ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया, एक यूज़र ने लिखा ह्यमून राइट कमिशन में कंप्लेंट की ताकि दोबारा ऐसा न हो

वेब ख़बरिस्तान। जालंधर में कोरोना काल में पिता की ओर से बेटी की लाश उठाने के मामले में खुलासा हुआ है कि उसे कोरोना नहीं था। अज्ञानता के चलते रामनगर निवासी दिलीप कुमार की बेटी के शव की ऐसी हालत हुई। बीते दिनों जब बेटी की अर्थी को कंधा देने कोई न आ या तो पिता कंधे पर बेटे के साथ लाश लेकर श्मशान घाट पहुंच गया। दस मई की इस घटना की वीडियो वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आया था। डीसी जालंधर घनश्याम थोरी ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि बेटी को कोरोना नहीं था। जिला प्रशासन के ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी दी गई।

बेटी को बुखार रहता था

रामनगर में रह रहे उड़ीसा के मूल निवासी दिलीप ने बताया कि उसके तीन बच्चे हैं। 11 साल की बेटी सोनू को दो महीने से बुखार था। वे इलाज करवा रहे थे। बीच-बीच में बुखार टूटा मगर आराम नहीं आया। सिविल अस्पताल में डाक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई और उन्हें अमृतसर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था।

दस मई को किया था संस्कार

9 मई को बेटी की मौत हो गई थी। रात करीब 1.30 बजे घर पहुंचे। अगले दिन संस्कार के लिए लोग इसलिए नहीं आए कि हो सकता है उसकी बेटी को कोरोना हो। किसी ने उसे कंधा नहीं दिया। लोगों ने कहा कि वह खुद बेटी को उठा ले। वे पीछे चलेंगे। एंबुलेंस बुलाने के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए वह कंधे पर बेटी की लाश उठाकर ले गया। लोगों की मौजूदगी में संस्कार हुआ। 

उड़ीसा का रहने वाला है परिवार


दिलीप पिछले कई सालों से जालंधर में काम कर रहे हैं। पत्नी सुनीता बोल नहीं पाती। दिलीप ने कहा कि उनकी बेटी को अमृतसर अस्पताल ने कोरोना पॉजिटिव बताया था, हालांकि उन्हें कन्फर्म नहीं है। अस्पताल से उसकी लाश भी वहां से कपड़ा मांगकर फिर यहां तक लेकर आए। उन्हें नहीं पता कि उनकी बेटी कोरोना से मरी या सिर्फ बुखार से। उसको कोरोना जैसे लक्षण जरूर थे। जांच में अस्पताल से मिले डाक्यूमेंट से खुलासा हुआ कि बेटी को कोरोना नहीं था। अब पिता अस्पताल से हुई बातचीत के मुताबिक बेटी को कोरोना पाजेटिव मान बैठा। ये जांच का विषय है कि आखिर अस्पताल में उसे किसने कहा कि बेटी पाजेटिव है। 

ट्विटर पर लोगों ने किया विरोध

डीपीआरओ जालंधर की ओर से किए गए ट्वीट के जवाब में लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमनदीप सिंह बैंस ने लिखा कि ये कोई मायने नहीं रखता कि कारण क्या था। पहले लेवल पर ही नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ। इस मामले की पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट कमिशन के पास कंप्लेंट की है ताकि दोबारा ऐसा न हो सके। अमित कुमार यादव ने लिखा कि इसका मतलब सरकार के लिए कोरोना के अलावा मरने वालों का कोई मायना नहीं है। 

 

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