चार साल से कांग्रेस की कांग्रेस के बीच ही चल रही लड़ाई, कैप्टन को शुरु से पसंद नहीं गुरु



कांग्रेस में शामिल करने पर भी कैप्टन ने जताया था एतराज, राहुल और प्रियंका के दबाव में माने थे

वेब ख़बरिस्तान। कांग्रेस में कई दिन से चल रहा कलेश लगता है कि खत्म हो गया है मगर ऐसा नहीं है। आने वाले दिनों में ये कांग्रेसियों की कांग्रेस के बीच की लड़ाई थमने वाली नहीं है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सिद्धू को बड़बोलापन पसंद नहीं है। सिद्धू हैं कि उन्हें हर वक्त सुर्खियों में रहने की आदत है। कैप्टन को सिद्धू शुरू से ही पसंद नहीं हैं।


नवजोत सिद्धू 2017 में कांग्रेस में शामिल हुए तो  कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऐतराज जताया था। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के दबाव के चलते कैप्टन माने थे। तब चुनाव को एक महीना बचा था। सिद्धू ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। चर्चा थी कि सिद्धू को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। मगर कैप्टन ने उन्हें तरजीह नहीं दी। सिद्धू को स्थानीय निकाय विभाग मिला। 

कैप्टन के रोकने के बावजू पाकिस्तान गए

18 अगस्त, 2018 को जब इमरान खान प्रधानमंत्री बने तो सिद्धू उनके शपथ ग्रहण समारोह में चले गए। हालांकि कैप्टन ने उन्हें रोका था।  फिर वह करतारपुर कारिडोर को खोलने को लेकर पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और नवजोत सिद्धू गले मिले, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बाजवा के बहाने सिद्धू पर निशाना साधा। 2019 के लोकसभा चुनाव में सिद्दू ने पंजाब में कम प्रचार किया। बठिंडा में रैली के दौरान उन्होंने नाम लिए बगैर कैप्टन और अकालियों के रिश्तों पर सवाल खड़ा किया था। 

सरकार के खिलाफ खोल रखा था मोर्चा

इस्तीफा देने के बाद सिद्धू कई महीने शांत रहे। फिर अचानक एक दिन किसानों के हक में प्रदर्शन में शामिल हुए। बेअदबी कांड और ड्रग्स को लेकर व लगातार सरकार पर सवाल खड़े कर रहे थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी सिद्धू को सीधे सीधे पटियाला से उनके खिलाफ चुनाव लडऩे की चुनौती दे दी। प्रभारी हरीश रावत ने दोनों की मुलाकातें करवाया मगर हाथ मिले दिल फिर भी नहीं मिले। सिद्धू लगातार कैप्टन का विरोध कर रहे थे। अब प्रधान बनने के बाद सिद्धू कैसे काम करेंगे और कैप्टन के साथ कैसा रिश्ता बनाएंगे ये देखना बहुत दिलचस्प होगा। 

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