अमृतसर में निजी अस्पतालों ने गंभीर कोरोना मरीजों को भर्ती करने से किया इन्कार



आक्सीजन की किल्लतः कोरोना ने बढ़ाई प्रशासन व लोगों की चिंता, चिकित्सा सेवाएं सहमीं

वेब खबरिस्तान, अमृतसर। कोरोना वायरस ने प्रशासन और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अमृतसर में आक्सीजन संकट पैदा हो गया है जिसके बाद चिकित्सा सेवाएं सहम गई हैं। इसी कारण जिले के पाइवेट अस्पतालों ने कोरोना के गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने से इन्कार कर दिया है। मांग के अनुसार अस्पतालों में आक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। निजी अस्पताल मरीज को दाखिल करने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल प्रबंधकों का कहना है, प्रशासन सिर्फ गुरुनानक देव अस्पताल को आक्सीजन सप्लाई कर रहा है। निजी अस्पतालों को केवल एक या दो सिलेंडर ही दिए जा रहे हैं। एक सिलेंडर दस-पंद्रह मिनट में खत्म हो जाता है। ऐसे में निजी अस्पताल गंभीर कोरोना मरीज का उपचार नहीं कर सकते। एयरपोर्ट रोड, जीटी रोड, बटाला रोड, बाईपास स्थित कई बड़े अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया है। नीलकंठ अस्पताल में छह मरीजों की मौत के बाद कार्रवाई के डर से भी अस्पताल प्रबंधन सहमे हुए हैं

भुल्लर गैस सर्विस में रोजाना 50 सिलेंडर तैयार हो रहे


न्यू अमृतसर स्थित भुल्लर गैस सर्विस में आक्सीजन का स्टाक खत्म हो चुका है। वह एयर आक्सीजन को मेडिकल आक्सीजन में परिवर्तित कर हर रोज 50 सिलेंडर तैयार कर रहे हैं। इनकी आपूर्ति गुरुनानक देव अस्पताल में की जा रही है। अजीत सिंह भुल्लर ने बताया है कि आक्सीजन की मांग 20 प्रतिशत बढ़ी है। इसे पूरा करना मुश्किल हो पा रहा है।

निजी अस्पताल आक्सीजन संकट से गुजर रहे: आइएमए

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के अध्यक्ष डा. आरएस सेठी का कहना है कि निजी अस्पताल आक्सीजन संकट से गुजर रहे हैं। इस कारण वे कोरोना के गंभीर मरीजों को दाखिल करने का जोखिम नहीं उठा सकते। डा. सेठी ने कहा, सरकार आक्सीजन का प्रबंध करे। इंडस्ट्री की आक्सीजन को डायवर्ट किया जाए। सबसे जरूरी आक्सीजन को रेगुलेट करें।

आक्सीजन रेगुलेट कर रहे हैं : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डा. चरणजीत सिंह ने कहा, हम आक्सीजन रेगुलेट कर रहे हैं। निजी अस्पतालों को आक्सीजन देने से मना नहीं किया गया। यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जितनी जरूरत हो उतनी ही आक्सीजन दी जाए। आक्सीजन की किल्लत दूर करने में सरकार प्रयासरत है। कुछ निजी अस्पतालों ने पहले ही सप्ताह भर का स्टाक सहेज रखा था। अब स्टाक सहेजने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।

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