अधिकतर लोगों को पता ही नहीं नवरात्र में क्यों बीजते हैं खेत्री



जौ को मिट्टी के पात्र में बोया जाता है, कई जगहों पर इसे ज्वार भी कहा जाता है

खबरिस्तान नेटवर्क। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। इसमें आदि शक्ति की उपासना से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। नवरात्र में प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के समय जौ बोने की भी परंपरा है। कई जगहों पर इसे ज्वार भी कहा जाता है। जौ को मिट्टी के पात्र में बोया जाता है और इसका पूजन किया जाता है। अधिकतर लोगों को ये पता ही नहीं कि आखिर नवरात्र में जौ बोते क्यों हैं। आइए आज आपको बताते हैं कि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि की सबसे पहली फसल जौ थी। इसलिए नवरात्र में देवी की उपासना से पहले इन्हें मिट्टी के बर्तन में बोने की परंपरा है। जौ एक पूर्ण फसल होती है। नवरात्र पूजा में केवल जौ बोने का ही महत्व नहीं है, बल्कि यह कितनी तेजी के साथ बढ़ती है, ये भी अहम होता है। इसके विकास को हमारी सुख-समृद्धि के साथ जोड़कर देखा जाता है। मिट्टी के बर्तन में उगने वाली जौ हमारे जीवन के बारे में कई संकेत देती है।

क्या संकेत  देती है जौ?


अगर जौ घनी नहीं उगती है या ठीक से नहीं उगती है तो ये एक अशुभ संकेत समझा जाता है। अगर जौ का रंग सफेद है और ये बिल्कुल सीधी उगे तो ये जीवन में तरक्की और खुशहाली का संकेत देती है। अगर जौ का रंग काला है और ये टेढ़ी-मेढ़ी उगती है तो इसे अशुभ माना जाता है। अगर जौ का रंग नीचे से हरा और ऊपर से पीला है तो ये साल की अच्छी शुरुआत, लेकिन अंत खराब होने का संकेत देती है। वहीं, अगर जौ का रंग नीचे से हरा और ऊपर से पीला हो तो इसे साल की अच्छी शुरुआत लेकिन बाद में परेशानियों के साथ जोड़कर देखा जाता है कहते हैं कि अगर जौ घनी और हरी उगती है तो पूरा वर्ष अच्छा बीतने का संकेत मिलता है। 

इस साल हाथी पर सवार होकर आई हैं देवी मां 

हर बार देवी का आगमन किसी विशेष वाहन पर होता है। इससे आने वाले समय के बारे में अनुमान लगाया जाता है। इस बार देवी का  आगमन हाथी पर हुआ है। यह आर्थिक समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक है। लोगों के जीवन में सुख की वृद्धि होगी और जीवन में धैर्य और आनंद प्रकट होगा। ऐसा कहते हैं कि जब देवी मां हाथी पर सवार होकर आती हैं तो बहुत ज्यादा वर्षा होती है। खेत-खलियान हरे-भरे रहते हैं और अन्न की कहीं कमी नहीं रहती है। 

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