कल है तीसरा नवरात्र, करें मां चंद्रघंटा की पूजा



मां चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति का स्वभाव हो जाता है विनम्र

खबरिस्तान नेटवर्क। 26 सितंबर से शुरू हो चुके शारदीय नवरात्र के तीसरे पर्व पर मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन माता चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति का स्वाभाव सौम्य और विनम्र हो जाता है। साथ ही उनके जीवन में खुशियों का अम्बार लग जाता है। 

देवी चंद्रघंटा का अलौकिक स्वरूप

शास्त्रों के अनुसार माता चंद्रघंटा का रंग सोने के समान तेजवान है। माता के तीन नेत्र और 10 भुजाएं हैं। इनके हाथों में कमल का पुष्प, गदा, बाण, धनुष, त्रिशूल, खड्ग, चक्र, खप्पर, और अग्नि सुशोभित हैं। मां चंद्रघंटा शेर पर सवार होकर आती हैं और हर समय युद्ध के लिए तैयार रहती हैं।

देवी चंद्रघंटा पूजा विधि 


नवरात्र के तीसरे दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके पूजा स्थल कि सफाई करें। फिर नित्यपूजा के साथ 'ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः' मंत्र का जाप करें। इसके बाद माता को गंध, पुष्प, धूप, अक्षत, सिंदूर अर्पित करें और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और आरती करें।

पूजा महत्व

माता चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक के सभी दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं और वह निर्भय व वीर बन जाता है। देवी की आराधना से व्यक्ति के मुख, नेत्र और काया में सकारात्मक विकास होता है। इसके साथ बुद्धि और ज्ञान में भी वृद्धि होती है।

इस रंग का करें प्रयोग

देवी की पूजा के समय भूरे रंग का वस्त्र पहनना व्यक्ति के लिए बहुत फलदायी साबित हो सकता है। साथ ही व्यक्ति स्वर्ण रंग के वस्त्र भी धारण कर सकता है। इन दोनों रंगों को इस दिन शुभ माना गया है। इसके साथ भक्त इस दिन दूध से बने मिष्ठान का भोग लगा सकते हैं। माता को शहद भी बहुत प्रिय है। 

Related Tags


third Navratr worship Maa Chandraghanta khabristan news

Related Links


webkhabristan