मौत सिखाने वाले गुरु की मौत आज भी रहस्य है



आज ही के दिन पुणे के कोरेगांव आश्रम में ली थी आखरी सांस

वेब खबरिस्तान। ऊपर वाले की करनी कोई नहीं समझ सकता। कौन सोच सकता है कि जो लोगों को मरना सिखाते थे उनकी अपनी मौत बेहद संदिग्ध होगी। जी हां हम बात कर रहे हैं कुशल वक्ता, दार्शनिक, आलोचक और गुरू ओशो की। 1931 में मध्य प्रदेश के कुचवाड़ा गांव में पैदा हुए ओशो का घरवालों ने नाम रखा रजनीश चन्द्र मोहन जैन। जो बाद में आचार्य रजनीश और फिर ओशो हुआ। फिलास्फी के प्रोफेसर ने पढ़ाना छोड़ 60 के दशक में पब्लिक टाक्स शुरू कीं।

विचार क्रांतिकारी थे और स्टाइल बेहद मनमोहक। 1969 में विश्व हिंदू कांफ्रेंस में उन्होंने ये कहकर हंगामा खड़ा कर दिया कि – जो धर्म जीवन को व्यर्थ बताए, वो धर्म नहीं। सुनने वालों में बैठे पुरी के शंकराचार्य नाराज हुए और उन्होंने ओशो का भाषण रोकने की भी कोशिश की। फिर पुणे को कोरेगांव में आश्रम बनाया। आश्रम की व्यवस्था और ओशो की ध्यान विधियां गोरों बहुत पसंद आईं और अस्सी के दशक में हजारों गोरे यहां आने लगे। आश्रम को लेकर तरह-तरह की बातें उठीं। उस पर ओशो कहते थे- मृत्यु का उत्सव मनाओ। ओशो का स्टाइल और बातें भारत में कुछ लोगों को चुभने लगीं। ओशो सेक्स पर खुलकर बात करते थे।

अमेरिका ने देश निकाला दिया

ओरेगॉन में करीब 64, 229 एकड़ बंजर ज़मीन खरीदकर ओशो को शिष्यों ने अमेरिका बुला लिया। देखते ही देखते शिष्यों बंजर जमीन पर बड़ी-बड़ी इमारतें, सड़कें और हाल बना लिए। यहां तक कि कम्युन ने अपना जहाज भी खरीद लिया। आसपास रहने वाले अमेरिकीयों को ये रास नहीं आया और ओशो पर कई आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर देश निकाला दे दिया। 21 देशों ने उनकी एंट्री बैन कर दी।

1985 में ओशो वापस पूना लौट आये और 19 जनवरी को आज ही के दिन 1990 को उनकी मौत हो हुई। मगर आज भी ओशो की मौत एक रहस्य ही है। कुछ लोग कहते हैं कि गिरफ्तारी के दौरान अमेरिका ने ओशो को ‘थेलियम’ नाम का स्लो पॉइजन दिया था, जिससे उनकी धीरे-धीरे मौत हुई।

19 जनवरी को आखरी सांस ली


कुछ लोग उनकी मौत की वजह उनकी जायदाद को मानते हैं। 19 जनवरी को ओशो को डाक्टर गोकुल गोकानी को दोपहर एक बजे ये कर कर बुलाया गया कि किसी की तबीयत खराब है जल्दी आएं। मगर गोकानी को शाम 5 बजे ओशो से मिलवाया गया। पास अमृतो और जयेश (माइकल ओ ब्रायन) मौजूद थे। ओशो के हाथ में उल्टियों की छीटें थे। चार घंटे क्या हुआ कोई नहीं जानता। आश्रम में मौजूद डाक्टरों को क्यों नहीं बुलाया गया। उन्हें अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया ये आज तक कोई नहीं जानता।

बकौल गोकानी- अमृतो ने उन्हें कहा ओशो ने अभी-अभी शरीर छोड़ा है। आपउनका डेथ सर्टिफिकेट लिख दो। मगर उनका शरीर गर्म था और साफ़ है कि मौत एक घंटे से पहले नहीं हुई थी। गोकानी कहते हैं उन्होंने ओशो को अंतिम सांस लेते नहीं देखा। जब जयेश और अमृतो से मौत की वजह पूछी तो उन्होंने गोकानी से कहा लिख दो दिल की बीमारी से मौत हुई। दिल की बिमारी में पोस्टमार्टम नहीं होता। ओशो की सेक्रेटरी नीलम के मुताबिक जब उन्होंने ओशो की मां को उनकी मौत की बात बताई तो उन्होंने कहा –”नीलम, उन्होंने उसे मार दिया.”

मौत सिखाने वाले की अपनी मौत आज भी रहस्य के पर्दे के पीछे छिपी है। पुणे आश्रम में उनकी कब्र पर लिखा है- ओशो, जो न पैदा हुए न मरे। इस धरती पर 11 दिसम्बर 1931 से 19 जनवरी 1990 के बीच भ्रमण के लिए आए।

19 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएं – Important events of January 19

1795 – फ्रांसीसी फ़ौजों ने हॉलैंड को तबाह किया।1927 – ब्रिटेन ने अपनी सेना को चीन भेजने का निर्णय लिया।1942 – दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने बर्मा (वर्तमान म्यांमार) पर कब्ज़ा किया।1977 – समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध अमेरिका के मिआमी शहर में पहली बार बर्फ़ गिरी।1986 – पहला कम्प्यूटर वायरस सी.ब्रेन एक्टिव किया गया।

भारत -इंदिरा तीसरी बार प्रधानमंत्री बनीं

1966 – इंदिरा गांधी को आज ही के दिन भारत का तीसरा प्रधानमंत्री चुना गया।1975 – हिमाचल प्रदेश में भूकंप आया।2003 – पाकिस्तान में भारतीय राजनयिक सुधीर व्यास को प्रताड़ित किया गया।2005 – सानिया मिर्ज़ा लॉन टेनिस के आस्ट्रेलिया ओपन के तीसरे दौर में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

19 जनवरी जन्मदिन – Born on 19 January

कैफ़ी आज़मी 1919, उर्दू शायरसौमित्र चटर्जी 1935, बंगाली फ़िल्म अभिनेता

19 जनवरी पुण्यतिथि – Died on 19 January

महाराणा प्रताप, 1597, मेवाड़ के राजपूत वीरदेवेन्द्र नाथ टैगोर, 1905, नोबेल पुरस्कार विजेता रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिता और भारतीय चिंतक, विचारकआचार्य रजनीश (ओशो) 1990, धर्मगुरुउपेंद्रनाथ अश्क 1995, हिन्दी साहित्यकार

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