20 साल का होने के बाद अपने बच्चों को जरूर सिखाएं ये बातें



मेंटली स्ट्रॉन्ग और इमोशनली हेल्दी बनेंगे आपके लाडले

खबरिस्तान नेटवर्क। हर मां-बाप की कोशिश होती है कि वे अपने बच्चे की परवरिश में कोई कसर न रहने दें। लोग अपने बच्चों को जिंदगी में सफल होते और बेहतर इंसान बनते देखना चाहते हैं और इसीलिए, उम्र के हर पड़ाव पर वे अपने बच्चों को गाइडेंस और सलाह देते रहते हैं। टीनएज के बाद जब बच्चे थोड़े बड़े हो जाते हैं तब उनके साथ माता-पिता को भी अपना व्यवहार बदलना पड़ता है। 18 या 20 साल के बच्चे अचानक से अपने जीवन में बहुत कुछ नया अनुभव करते हैं। ऐसे में उनकी मानसिक स्थिति को समझना और उसी के अनुसार उनकी मदद करने की कोशिश करना महत्वपूर्ण है। लेकिन अधिकांश मामलों में माता-पिता यह समझ नहीं पाते कि 20 की उम्र के बाद उनके बच्चे की उम्मीदें क्या हैं और पेरेंट्स को इस उम्र में बच्चों को क्या सिखाना या समझाना चाहिए।

पर्सनल हाइजिन का रखें ख्याल

वयस्क होते बच्चों को प्रसनल हाइजिन के बारे में समझाएं। दाढ़ी बनाने से लेकर नहाने और लड़कियों को पीरियड्स के दौरान अपनी देखभाल और साफ-सफाई के महत्व के बारे में समझाएं। इससे बच्चों को हेल्दी रहने, इंफेक्शन्स से बचने और उनकी ग्रूमिंग में सहायता होगी।  

बच्चों को है अपनी बात कहने की आजादी


आमतौर पर कॉलेज आने-जाने वाले बच्चों के करियर को लेकर मां-बाप उन्हें अक्सर कई सवाल पूछते हैं जैसे,कॉलेज खत्म होने के बाद बच्चे क्या करेंगे, कॉलेज में वे किन चीजों में इंट्रेस्ट ले रहे हैं या किसी फील्ड में जाने के बारे में उन्होंने क्या सोचा है आदि। ऐसे सवालों से बच्चे अक्सर खीझ जाते हैं और मां-बाप से बहस करने लगते हैं। इससे बच्चों के मन में आपके लिए नेगेटिविटी भी आ सकती है और वे आपसे दूर-दूर भी भागने लगते हैं। दरअसल, बच्चों को लगता है कि मां-बाप पुराने समय की सोच उनपर लादना चाहते हैं और दिनभर केवल लेक्चर देना पसंद करते हैं। ऐसे में मां-बाप बच्चे पर अपनी बातें मानने के लिए दबाव ना डालें। बल्कि, वे धीरे-धीरे बच्चे की रूचि और उनके सपनों के बारे में बच्चों से जानकारी लेना शुरू करें। इस तरह बच्चे जब आप पर विश्वास रने लगेंगे तो खुद ही खुलकर इस बारे में आपसे बात जरूर करेंगे।

खुद को शांत रखना सीखें

टीनएज के बाद से ही बच्चों में यह रवैया देखा जाता है कि मां-बाप जब भी कुछ बोलते हैं तो बच्चे उनपर ही गुस्सा हो जाते हैं। बच्चों को लगता है कि मां-बाप उन्हें पुरानी बातें सुनाकर बोर कर रहे हैं या वे बच्चों को जबरन बीते जमाने की बातों पर चलने के लिए फोर्स कर रहे हैं। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चे को समझाएं कि उनका इरादा केवल बच्चे की मदद करना है। इसीलिए, जब बच्चे गुस्सा करें या आपकी बात मानने से इनकार करें तो उन्हें भला-बुरा कहने की बजाय खुद को शांत रखें। जब बच्चे का गुस्सा शांत हो जाए तो बड़प्पन दिखाते हुए उससे शांत लहजे में ही बात करें।  

मां और बाप दोनों की सहमति है जरूरी

अक्सर देखा जाता है कि बच्चे परिवार में किसी एक व्यक्ति से बहुत करीब होते हैं। इसी तरह मां-बाप में से भी बच्चा किसी एक के साथ ही खुलकर बात करता है और अपनी बातें भी उन्हीं से मनावाना पसंद करता है। लेकिन, 20 साल की उम्र के बाद बच्चों को समझाएं कि वे जो कुछ भी करना चाहते हैं उसके लिए उन्हें मां और बाप दोनों को मनाना होगा। अगर , उसकी बात सही है और उससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचने वाला तो यह बच्चे की जिम्मेदारी है कि वे मां और बाप दोनों को कन्वींस कर सके। 

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