सड़क हादसे के बाद क्लेम दिलाने का फ्राड, घरवालों से धोखे से लिए डाक्यूमेंट, कोर्ट में लगा दिया केस

सांकेतिक तस्वीर।

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प्रेस रिपोर्टर बनकर आए, क्लेम दिलाने के नाम पर घरवालों के डाक्यूमेंट और दस्तखत ले गए

खबरिस्तान नेटवर्क। फुटबाल चौक के पास 5 तारीख को हुए सड़क हादसे में महिला की मौत के मामले में शहर में सड़क हादसे में चल रहे मुआवजा गिरोह का खुलासा हुआ है। बीते दिनों फुटबाल चौक के पास हुए सड़क हादसे में महिला की मौत के मामले में ये खुलासा हुआ है।  

हादसे का शिकार हुई महिला के पति अमनदीप के पास 6 तारीख को दो लोग रिपोर्टर बनकर पहुंचे और उन्होंने कहा कि वे प्रेस से हैं अपना इंट्रव्यू दो और मोटर क्लेम का मुआवजा दिलाने का काम करते हैं और उन्होंने एक एनजीओ बनाई हुई है जो सारा खर्च खुद करती है आपको कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है। अमनदीप ने उन्हें कहा कि – कल तो मेरी बीवी की मौत हुई है और आप लोग क्लेम की बात कह रहे है। अमनदीप ने उन्हें कुछ भी देने से इनकार कर दिया।

ससुरालियों को झांसे में लिया


इसके बाद दोनों उसके ससुराल संत नगर चले गए। दोनों ने उन्हें भी झूठी बातों में फंसा लिया। अमनदीप ने कहा कि उसे उसके ससुर ने बुला लिया और दस्तखत करने के लिए कहा। दोनों आरोपियों ने उनसे झूठ बोलकर धोखाधड़ी की नीयत से कागजात ले लिए। वे अपना फोन नंबर भी देकर गए थे।

अमनदीप ने अपने रिश्तेदार देव राज एडवोकेट को सारे मामले के बारे में बताया। एडवोकेट देवराज ने उक्त फोन नंबर पर जब बात की तो अपना नाम जतिंदर बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि उसने जालंधर में दो वकील रखे हुए हैं, जो मोटर एक्सीडेंट क्लेम के केस करते हैं। जब देवराज ने उसे बताया कि वह खुद एडवोकेट हैं तो उसने फोन काट दिया।

कोर्ट पहुंच गया मामला

अमनदीप को 12 तारीख को पता चला कि उनकी ओर से कोर्ट में केस दायर किया गया है। जब वह कोर्ट पहुंचे तो ये बात सच निकली। जबकि उन्होंने किसी वकील को इसके लिए मुकरर नहीं किया। अमनदीप ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि आरोपी उसके डाक्यूमेंट का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

लोगों से की अपील

सीनियर वकील देव राज ने बताया कि शहर में ये बड़ा गिरोह काम कर रहा है। जो शहर के भोले भाले लोगों को मूर्ख बनाकर मुआवजे के नाम पर रैकेट चला रहे हैं। एडवोकेट देवराज ने लोगों से अपील कि है कि अगर किसी परिवार में कोई भी सड़क हादसे का शिकार होता है तो किसी फर्जी एनजीओ या किसी फ्राड के बहकावे में आकर किसी कागजात पर दस्तखत न करें और न ही अपना कोई दस्तावेज किसी को दें।

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