डाक्टर जवाहर धीर की पुस्तक 'अब हुई न बात ' का हुआ भरपूर स्वागत

डा. जवाहर धीर की किताब का कवर पेज।

डा. जवाहर धीर की किताब का कवर पेज।



साहित्यकार प्रेम विज ने कहा समाज के समक्ष नए प्रश्न व मुद्दे भी खड़े करती हैं पुस्तक की लघुकथाएं

खबरिस्तान नेटवर्क। फगवाड़ा  में पन्द्रह  पुस्तकों के प्रकाशन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले फगवाड़ा निवासी लेखक डा.जवाहर धीर की लघुकथाओं की ताजा प्रकाशित पुस्तक "अब हुई न बात " का साहित्य जगत में भरपूर स्वागत हुआ है। दोआबा साहित्य एवं कला अकादमी के अध्यक्ष डा जवाहर धीर का कहना है कि पुस्तक पर देश भर से मिली सकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने उनकी लेखन कला की पुष्टि की है।


पंजाब के शिरोमणि साहित्यकार मोहन सपरा ने लिखा है कि इस लघुकथा संग्रह की लघुकथाओं को पढ़ कर महसूस होता है कि  डा.धीर की लघुकथाएं अपने कथा शिल्प के कारण समाज को निर्वस्त्र करती हैं तथा बदलाव का आह्वान करती हैं । डा धीर की लिखी  लघुकथाएं अपनी विशिष्ट शैली के कारण उन्हें इधर के विशिष्ट लघुकथाकारों की पंक्ति में ला खड़ा करता है।

साहित्यकारों ने सराहा

चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव प्रसिद्ध साहित्यकार प्रेम विज का कहना है कि इस पुस्तक की लघुकथाएं पाठक को न सिर्फ उद्वेलित करती हैं अपितु समाज के समक्ष नए प्रश्न व मुद्दे भी खड़े करती हैं। सिरसा के विख्यात समीक्षक ज्ञान प्रकाश 'पीयूष' का मानना है कि डा जवाहर धीर का रचना संसार बहुत विशाल है और हर विधा के लेखन में उन्होने सफलता हासिल की है।

इसी प्रकार शिरोमणि साहित्यकार डा केवल धीर व डा अजय शर्मा, पंजाब हिन्दी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा कैलाश भारद्वाज, पंकस अकादमी के अध्यक्ष सिमर सदोषहरियाणा की ग्रन्थ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश भारतीय, त्रिवेणी साहित्य अकादमी की अध्यक्षा गीता डोगरा, लेखक मनोज धीमान, धर्म पाल साहिल, फकीर चन्द शुक्ला,कुलभूषण कालड़ा, टी.डी.चावला आदि ने भी पुस्तक अब हुई न बात के प्रकाशन के लिए प्रकाशक आस्था प्रकाशन एवं लेखक डा जवाहर धीर की भरपूर प्रशंसा की है।

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