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रीडर्स थॉट - बच्चों के पंख न काटें उन्हें उड़ने दें

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मुल्ला नसरुद्दीन के फार्मूले  -किसी को गधे को आगे लेकर जाओगे तो वह तुम्हारा नुकसान ही करेगा

मुल्ला नसरुद्दीन के फार्मूले  -किसी को गधे को आगे लेकर जाओगे तो वह तुम्हारा नुकसान ही करेगा

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन जोश जोश में अपने गधे को घर की छत पर ले गए...पढ़िए फिर क्या हुआ।


जब दुनिया में हैजा फैला तो ओशो ने महामारी को लेकर ये कहा था

जब दुनिया में हैजा फैला तो ओशो ने महामारी को लेकर ये कहा था

कोरोना ने दुनिया भर में तबाही मचा रखी है। इस समय भारत इसकी गिरफ्त में है। रोजाना हजारों मौतें हो रही हैं और लाखों पाजेटिव आ रहे हैं। बिमारी से ज्यादा अब डर फैल चुका है। पूरे देश में आक्सीजन को लेकर संकट बना हुआ है। आक्सीजन की कमी से अस्पतालों में कई लोगों की मौत हो गई। गंगा में लाशें मिली हैं। दिल्ली में कई श्मशान घाटों पर रोज सौ से ज्यादा संस्कार किए गए। जरा सा बुखार हो जाए। फौरन ध्यान कोरोना पर जाता है। अजीब से माहौल है। हर कोई तनाव में हैं। ऐसे माहौल में महापुरुषों की बातें कुछ हिम्मत देती हैं। महामारी को लेकर हमारे कई ग्रंथों में जिक्र मिलते हैं। अलग-अलग संतों महात्माओं ने इस पर बात की है। 70 के दशक में जब देश में हैजा फैला था तो ओशो ने एक भक्त के सवाल पूछने पर महामारी को लेकर प्रवचन दिए थे, जिन्हें अपने पाठकों के लिए हम पेश कर रहे हैं। बात सत्तर के दशक की है। पूरी दुनिया में हैजा फैला हुआ था। तब एक प्रवचन के दौरान किसी ने ओशो से पूछा था कि इस महामारी से कैसे बचें? कोरोना महामारी के दौर में उपजे इस अवसाद, नकारात्मकता और डर से लड़ने के लिए ओशो का जवाब एक कारगर उपाय सा लगता है. ओशो ने कहा था कि आपका यह प्रश्न ही गलत है. आपको पूछना चाहिए कि इस महामारी से मरने का जो डर है, इससे कैसे बचा जाए? ओशो ने कहा था कि महामारी से बचना आसान है, लेकिन इसकी वजह से जो डर लोगों में पैदा हुआ है, उससे बचना मुश्किल है. लोग इस महामारी से कम और इसकी वजह से उपजे डर से ज्यादा मरेंगे. 'डर' से ज्यादा खतरनाक वायरस इस दुनिया में कोई नहीं है. इस डर को समझिए, अन्यथा मौत से पहले ही आप एक जिंदा लाश बन जाएंगे. ओशो ने कहा था कि इस भयावह माहौल का वायरस आदि से कोई लेना देना नहीं है. यह एक सामूहिक पागलपन है, जो एक अंतराल के बाद हमेशा घटता रहता है. कारण बदलते रहते हैं, कभी सरकारों की प्रतिस्पर्धा, कभी कच्चे तेल की कीमतें, कभी दो देशों की लड़ाई, तो कभी जैविक हथियारों की टेस्टिंग. सामान्यत: आप अपने डर के मालिक होते हैं, लेकिन सामूहिक पागलपन के क्षण में आपकी मिल्कियत छिन सकती है. टीवी पर खबरें सुनना या अखबार पढ़ना बंद करें. ऐसा कोई भी वीडियो या न्यूज मत देखिए, जो आपके भीतर डर पैदा कर रहा हो. प्रशासनिक आदेशों तथा सरकार के निर्देशों का अक्षरशः पालन करें. महामारियों के अलावा भी बहुत कुछ है, जिस पर ध्यान दिया जा सकता है.ओशो ने कहा था कि महामारी से बचना आसान है, लेकिन इसकी वजह से जो डर लोगों में पैदा हुआ है, उससे बचना मुश्किल है। धीरज रखिए, जल्द ही सब कुछ बदल जाएगा. जब तक मौत आ ही न जाए, तब तक उससे डरने की कोई जरूरत नहीं है. जो अपरिहार्य है, उससे डरने का कोई अर्थ भी नहीं है. डर एक प्रकार की मूढ़ता है, अगर किसी महामारी से अभी नहीं भी मरे, तो भी एक न एक दिन मरना ही होगा और वो एक दिन कोई भी दिन हो सकता है. * इस लेख में लेखक के विचार निजी हैं. ये जरूरी नहीं कि वेब ख़बरिस्तान उनसे सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है।

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