नज़रिया

योग वह है जो आपको आनंद और विश्राम प्रदान करता है - गुरु श्री श्री रविशंकर

योग वह है जो आपको आनंद और विश्राम प्रदान करता है - गुरु श्री श्री रविशंकर

योग का सत्य - प्रत्येक आसन को इस बात को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए कि इसका लक्ष्य केवल आसन का सही होना नहीं

डाक्टर जवाहर धीर की पुस्तक अब हुई न बात  का हुआ भरपूर स्वागत

डाक्टर जवाहर धीर की पुस्तक 'अब हुई न बात ' का हुआ भरपूर स्वागत

साहित्यकार प्रेम विज ने कहा समाज के समक्ष नए प्रश्न व मुद्दे भी खड़े करती हैं पुस्तक की लघुकथाएं


ये है पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत का फार्मूला

ये है पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत का फार्मूला

ख़बरिस्तान नेटवर्क/पंजाब नाऊ। नतीजों से पहले सभी चुनावी पंडित कह रहे थे कि हंग असेंबली बनेगी, फिर एग्जिट पोल आए तो सबने आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की बात कही, सिवाय दैनिक भास्कर अखबार को छोड़कर। नतीजों के बाद आप के आलोचक कहने लगे कि ये आम आदमी पार्टी की जीत नहीं बल्कि कांग्रेस और अकाली दल की हार है। लोग दोनों पार्टियों से दुखी थे। इसलिए आप को मौका मिला है। इस पहलू में कुछ हद तक दम है मगर पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत ऐसे ही नहीं मिली है। ये जीत बेहद प्लांड तरीके से काम करने का नतीजा है। राजनीति अब आदेशों से चलने वाली चीज नहीं रह गई। वो जमाने गए जब चुनाव से पहले पार्टी के पद बांटकर और बड़े-बड़े वायदे करके चुनाव जीत लिए जाते थे। खैर वायदों पर तो अभी आम आदमी पार्टी भी कितना उतरेगा ये देखना होगा, मगर आम आदमी पार्टी की जीत कोई तुक्का नहीं है। केजरीवाल की टीम ने हर मोर्चे पर बढ़िया प्रदर्शन किया। शुरुआत हुई थी पिछले साल 11 अप्रैल से जब केजरीवाल ने झाड़ू चलाओ यात्रा शुरू की थी। क्या थी आम आदमी पार्टी की रणनीति। पार्टी ने तीन स्तर पर काम किया। एक टीम रणनीतिकार संदीप पाठक की अध्यक्षता में बनी, जिसमें उनके साथ चार लोगों ने काम देखा। ये टीम पर्दे के पीछे थी। दूसरी टीम थी नेता विपक्ष हरपाल सिंह चीमा और अनमोल गगन मान की। चीमा ने समय-समय पर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलकर रखा और चंडीगढ़ में बड़े प्रदर्शन किए। चीमा मुलाजिमों के बीच पहुंचे। सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मुलाजिमों से मिले और उनमें अपनी जगह बनाई। अनमोल गगन मान को दिल्ली माडल को पंजाब के लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली थी। वह समय समय पर दिल्ली गईं और वहां के मॉडल को मीडिया और सोशल मीडिय के जरिए लोगों तक पहुंचाया। तीसरा मोर्चा खुद अरविंदर केजरीवाल और भगवंत मान ने संभाला। उन्होंने लोगों से राब्ता बनाने का काम किया। दिल्ली मॉडल का सपना आम आदमी पार्टी ने पंजाब के लोगों को दिल्ली मॉडल का सपना दिखाया, जहां बिजली के यूनिट मुफ्त हैं। सरकारी स्कूल अच्छे हैं और मोहल्ला क्लिनिक चल रहे हैं। इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने पंजाब के लोगों के बीच खूब प्रचार किया। विधायक अनमोल गगन मान ने दिल्ली जाकर इस मॉडल को देखा और लोगों को भी दिखाया। इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को घेरा। बिजली को लेकर चंडीगढ़ में प्रदर्शन हुए। एजुकेशन को लेकर आप ने सरकार के खिलाफ उतरे मुलाजिमों का साथ दिया। एक बार तो केजरीवाल खुद टंकी पर चढ़े मुलाजिमों से मिलने पहुंच गए थे। स्कूलों के मुद्दे पर मनीष सिसोदिया ने पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह को फंसा लिया और उन्हें खुली बहस का चैलेंज दे दिया। परगट सिंह आम आदमी पार्टी की इस चुनौती के आगे फीके पड़ गए। किंग मेकर इस जीत में पंजाब में पार्टी के रणनीतिकार संदीप पाठक की अहम भूमिका रही है। केजरीवाल ने जीत के बाद इतवार को जब विधायकों से बात की तो सबके धन्यवाद के बाद पाठक को भी धन्यवाद कहा। संदीप आईआईटी से पढ़े हैं, लंदन रिटर्न हैं। वो पहले जानेमाने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ भी काम कर चुके हैं। संदीप पाठक 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी के अभियान को मैनेज कर चुके हैं। शुरू से पंजाब की चुनावी कैंपेन को इस तरीके से डिजाईन किया गया कि वो आम लोगों की सोच में दाखिल हो सके। चाहे वो एक मौका केजरीवाल को या एक मौका पंजाब को फिर देखो पंजाब को। संदीप पाठक के नेतृत्व में उनके पांच लोगों की एक टीम बनी जो ख़ुद भी सोशल मीडिया और चुनाव की लाइमलाइट से दूर रही। पंजाब को पांच ज़ोन में बांटा गया और एक व्यक्ति को एक ज़ोन की ज़िम्मेदारी दी गई। हर ज़ोन का पूरा अध्ययन करने के बाद उन्होंने चुनाव के लिए उम्मीदवारों को चुनने में मदद की। साथ ही यह भी पता लगाया गया कि किस उम्मीदवार को टिकट देने से किस प्रकार की नाराज़गी फैल सकती है. समय रहते पार्टी ने इसका हल भी निकाला। बेअदबी व बरगाड़ी कांड बेअदबी के जिस मुद्दे को लेकर अकाली दल को सत्ता गंवानी पड़ी कांग्रेस को भी उसका खामियाजा भुगतना पड़ा। आम आदमी पार्टी इस मुद्दे की गंभीरता को समझ गई थी। हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू इस मुद्दे को हर बार दोहराते थे। मगर आप ने इस मसले में पूर्व पुलिस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह को पार्टी ज्वाईन करवाकर मास्टर स्ट्रोक खेला। इस मामले की जांच से जुड़े ईमानदार छवि वाले कुंवर विजय प्रताप सिंह से बेहतर कौन था जो इस मामले को जनता के बीच ला सकता था। कुंवर ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया और इसकी पर्तें खोलीं। हालांकि इस पर अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान कम बोले। बदलाव के लिए वोट आम आदमी पार्टी ने अपने अभियान में शुरू से ही ये नैरेटिव सेट किया कि पिछले बीस साल से जनता ने अकाली दल, बीजेपी या कांग्रेस का शासन देखा है, इसलिए इस बार नई पार्टी को वोट देकर देखा जाए। यही बात लोगों को रास आई औऱ उन्होंने एक मौका आप को दे दिया। साथ ही पार्टी ने अपने दिल्ली मॉडल पर ख़ासा ज़ोर दिया जिसे वो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार का मॉडल कहती है. उन्होंने तीन सौ यूनिट फ़्री बिजली और 18 साल से ऊपर की औरतों को हज़ार रुपये महीना देने जैसे वादे भी किए हैं. वहीं, किसान आंदोलन की वजह से कृषि से जुड़ी समस्याएं भी चर्चा में आईं और इसे लेकर पुरानी सरकारों की नाकामियों पर भी चुनाव में काफ़ी चर्चा थी। महिलाओं पर फोकस किया इस चुनाव में सिर्फ आम आदमी पार्टी ही ऐसी थी जिसने केवल महिलाओं के लिए जनसभाएं की। इसका आम आदमी को बहुत फायदा मिला। जनसभाओं में महिलाओं का जोश देखकर आखिर में अरविंद केजरीवाल ने पत्नी और बेटी को भी इनसे जोड़ा। भगवंत मान की मां ने भी इनमें भाग लिया। उनकी भावुक अपील भी काम कर गई और भगवंत मान को जबरदस्त समर्थन मिल गया। व्यापारियों से संपर्क साधा बहुत पहले ही आम आदमी पार्टी ने व्यापारियों और कारोबारियों से बातचीत शुरू कर दी थी। दिसंबर में सबसे पहले विधायक सौरभ भारद्वाज ने इसकी शुरुआत की थी। फिर अरविंदर केजरीवाल और कुंवर विजय प्रताप ने मिलकर व्यापारियों के मसले सुने। केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया भी व्यापारियों से मिले। व्यापारियों ने अपनी समस्याएं बताईँ। अरविंद केजरीवाल ने इस पर जो आश्वासन उन्हें दिया व्यापारी वर्ग को उनकी बात समझ आ गई। पिछले चुनाव में भी अरविंद कारोबारियों से मिले थे। मालवा का कैंपेन 69 सीटों वाले मालवा पर पार्टी का पूरा फोकस था। 2017 के चुनाव में पार्टी ने कुल 20 सीटें जीती थीं जिसमें से 18 मालवा क्षेत्र की थीं। किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र भी यही क्षेत्र था। पार्टी ने इस बार भी मालवा पर ज़्यादा ध्यान दिया। मालवा को तीन ज़ोन में बांटा गया था और यहां पार्टी ने ज़ोरदार अभियान चलाया। चुनाव के नतीजे बताते हैं कि पार्टी को यहां साठ से ज़्यादा सीटें मिली हैं। पंजाब के बारे में ये कहा जाता है, जो मालवा जीतता वही ंपंजाब जीतता है। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला है। गलती नहीं दोहराई आम आदमी पार्टी ने इस बार समय रहते औऱ स्पष्ट तरीके से अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार भगवंत मान को घोषित किया। साल की शुरुआत से ही पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे को लेकर संशय बना हुआ था। पार्टी के बीच भगवंत मान को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाने का दबाव बढ़ता जा रहा था। केजरीवाल ये जरूर कह रहे थे कि सीएम का चेहरा पंजाब से ही होगा, मगर ये कहने से बच रहे थे कि वो चेहरा भगवंत मान होगा। मगर अरविंद केजरीवाल ने इस बार भगवंत मान की दावेदारी को भी एक कैंपेन बनाकर पेश किया। इस कैंपेन ने पार्टी वर्करों में नया जोश भर दिया। भगवंत मान के सीएम फेस घोषित होते ही पंजाब में आम आदमी पार्टी का चुनावी ग्राफ और ऊपर चलगा गया। इससे पहले 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी सीएम पद के उम्मीदवार को लेकर इसी तरह की स्थिति थी. पंजाब में आम आदमी पार्टी के लगभग आधे उम्मीदवार दूसरी पार्टियों से निकल कर 'आप' में शामल हुए थे। इसलिए दिल्ली और पंजाब के बीच ठनने की स्थिति आ सकती थी। लेकिन इस बार पार्टी आलाकमान ने वक़्त रहते फ़ैसला लिया और भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चेहरे के रूप में पेश किया। इसके लिए पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के बीच रेफ़रेंडम (जनमत संग्रह) भी करवाया।

https://webkhabristan.com/najariya/formula-of-aam-admi-party-win-election-in-punjab-7233
आप को मान गए - पंजाब में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की सुनियोजित रणनीति बनी जीत का कारण

आप को मान गए - पंजाब में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की सुनियोजित रणनीति बनी जीत का कारण

ख़बरिस्तान नेटवर्क (पंजाब नाऊ)। पंजाब में सरकार बन चुकी है। सीएम भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी का मंत्रिमंडल चुन लिया है। मंत्रिमंडल में कुछ बड़े चेहरे शामिल न होने ेसे लोगों को हैरानी जरूर हुई। खासकर कुंवर विजय प्रताप का नाम न आने पर । राज्यसभा में आप उम्मीदवारों काे भी नाम तय हो गए हैं। जिनमें राघव चड्ढा समेत तीन चेहरे बाहरी हैं। अभी तक तो आप में सबकुछ ठीक नज़र आ रहा है। मगर राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन ने विरोधी दलों को बोलने का मौका जरूर दे दिया है। अगर सरकार की परफार्मेंस पर नजर मारे ंतो। भगवंत मान ने सीएम बनते ही किसानों का मुआवजा जारी किया और 25000 नई नौकरियां देने की घोषणा की। फिर अरविंद केजरीवाल ने विधायकों के साथ वर्च्युअल मीटिंग की और ये कहा कि विधायकों को सबको साथ लेकर चलना होगा। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में एक मिसाल पैदा कर दी है। भगवंत मान सरकार का करप्शन करने वालों में पूरा डर है। अफसर समय पर दफ्तर पहुंच रहे हैं। रिश्वत की शिकायतें कम हो गई हैं। हर कोई सिस्टम में आने की कोशिश कर रहा है। भगवंत मान की करप्शन विरोधी हेल्पलाईन शुरू होने के बाद। पंजाब में बदलाव साफ नज़र आ रहा है। आप ने ये साबित कर दिया है कि वह अगर पंजाब में जीत सकती है तो वह अन्य राज्यों में भी देर सवेर जगह जरूर बना लेगी। आप के चयन का सफल फार्मूला आम आदमी पार्टी केे उम्मीदवारों के चयन पर शुरू में सवाल उठे थे। मगर जब नतीजे आए तो सारे सवालों के जवाब खुद ब खुद सामने आ गए। उम्मीदवारों के चयन में पालीटिकल कद के साथ-साथ उनकी वित्तीय हालत पर भी गौर किया गया यही कारण है कि आप के 74 फीसदी विधायक करोड़पति हैं। आम आदमी पार्टी का चुनाव लड़ने का तरीका भी अपग्रेड है। पंजाब चुनाव में भी पार्टी ने जमकर पैसा बहाया। एक-एक विधायक ने लाखों रुपए चुनाव प्रचार पर खर्च किए हैं। करोड़पतियों को तो इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। मगर आप के उन विधायकों का क्या, जिन्होंने चुनाव पर अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी। नई व्यवस्था में वे कैसे सर्वाईव करेंगे ये देखना होगा? क्योंकि इससे पहले ये व्यवस्था थी कि विधायक अपने-अपने इलाके के मालिक थे। उनकी मर्जी से पुलिस वालों की ट्रांसफर होती थी। बड़े पदों पर अफसरों की तैनाती से पहले पूछा जाता था। इसमें विधायकों की मर्जी चलती थी। हलके में सारे धंधे विधायकों की मर्जी के बिना नहीं चलते थे। सभी उनके दरबार में हाजरी भरते थे। अब केजरीवाल विधायकों को सादा जीवन और उच्च विचार रखने की बात कह रहे हैं। अगर विधायक ऐसा करते हैं तो ही पंजाब का भला हो सकता है, वरना भगवंत मान के रंगले पंजाब के सपने का सच होना मुश्किल है। केजरीवाल की हिदायत आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को पंजाब में विधायकों के साथ वर्चुअल मीटिंग की। केजरीवाल ने कहा कि इस जीत पर घमंड मत करना। जनता चुनकर सरकार चलाने का मौका देना जानती है तो वहीं जनता पटकना भी जानती है। आप विधायक रहते हुए ऐसा काम करो कि आपकी ख्याति चारों तरफ फैले। राजनीतिक दलों ने 70 साल बर्बाद कर दिए, अब 24 घंटे में से 30 घंटे काम करना पड़ेगा। हमारे 92 विधायक जीतकर आए हैं लेकिन मंत्री सिर्फ 17 ही बनाए जा सकते हैं। जो विधायक मंत्री नहीं बने वह किसी से कम नहीं हैं। पंजाब की जनता ने एक-एक हीरा चुनकर भेजा है। हर किसी में काम करने की अच्छी संभावना है। केजरीवाल ने कहा कि भगवंत मान ने 3 दिनों में ही लोगों को काम करके दिखाया। पुराने मंत्रियों की सुरक्षा हटाकर उसे जनता के लिए लगाया गया। अक्टूबर में फसलें बर्बाद हुई थी,उसका मुआवज़ा किसानों के ज़िलों में पहुंच गया, 3-4 दिनों में किसानों को उसका चेक मिलेगा। भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के हर दूसरे व्यक्ति ने हमें वोट दिया है, तो ये प्यार हम पंजाब के लोगों के लिए ही लगाएंगे। पहले ये होता था ऑर्डर कोई और देता था सस्पेंड कोई और होता था, ये अब नहीं चलेगा। बीजेपी का अपडेट वर्जन है आप चुनाव मैनेजमेंट के मामले में आप अब देश की सबसे अमीर पार्टी भारतीय जनता पार्टी और चुनाव रणीतिकार प्रशांत किशोर जैसे दिग्गजों को मात दे रही है। चुनाव के दौरान कैसे काम करना है इसके लिए बैकएंड पर एक टीम काम करती है। पंजाब में भी संदीप पाठक की लीडरशिप में पांच लोगों की टीम ने काम किया। ये लोग पर्दे के पीछे रहते हैं और कहीं भी सोशल मीडिया पर सामने नहीं आते। यह टीम पार्टी के कैंपेन तैयार करती है कि कब किस विषय को उठाना है। कब किस मुद्दे को लेकर क्या करना है। पंजाब चुनाव में इस टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। आम आदमी पार्टी की छवि को सुधारने के साथ-साथ कांग्रेस का अक्स बिगाड़ने में साथ-साथ काम चला। एक टीम सरकार को घेर रही थी। एक टीम लोगों से संपर्क साथ रही थी। सबसे ज्यादा दागी और करोड़पति पंजाब में नवनिर्वाचित विधायकों में से आधे के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हैं। ये आंकड़ा पिछले सदन में 14 फीसदी के मुकाबले हुत ज्यादा है। 27 (23%) विधायकों के खिलाफ गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। पंजाब के एक विधायक पर हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज है और उसकी गिरफ्तारी पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अभी रोक लगा रखी है। दो पर हत्या के प्रयास का मामला चल रहा है। इन मामलों का सामना कर रहे तीनों विधायक आम आदमी पार्टी के हैं। 52 पर आपराधिक केस पिछले हफ्ते एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और पंजाब इलेक्शन वॉच ने पंजाब चुनाव के बाद रिपोर्ट जारी की। आप के 92 विधायकों में से 52 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। वहीं कांग्रेस के 18 में से तीन विधायक, शिरोमणि अकाली दल के तीन में से दो विधायक और बीजेपी के दो विधायकों में से एक आपराधिक केस वाले हैं। शीतल अंगुराल पर दर्ज सबसे ज्यादा केस जालंधर वेस्ट से आप विधायक शीतल अंगुरल के खिलाफ सबसे ज्यादा नौ मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या के प्रयास, अपहरण, अवैध कारावास, जुआ और अन्य अपराध शामिल हैं। खडूर साहिब के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा के खिलाफ पांच केस दर्ज हैं। अजनाला आप विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल का नाम एक हत्या के मामले में प्राथमिकी में दर्ज है और उनकी गिरफ्तारी पर अभी रोक लगी है। लुधियाना पूर्व आप विधायक दलजीत सिंह ग्रेवाल के खिलाफ दो अन्य मामलों के अलावा हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है।आप के 74 फीसदी विधायक करोड़पति आम आदमी पार्टी के 87 (74%) विधायक करोड़पति हैं, जो पिछले कार्यकाल में 95 (81%) थे। इन करोड़पतियों में आप के 63, कांग्रेस के 17, शिअद के तीन, भाजपा के दो और बसपा के एक करोड़पति शामिल हैं। कुलवंत सबसे ज्यादा अमीर आप के मोहाली विधायक कुलवंत सिंह 238 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर हैं। इसके बाद राणा गुरजीत सिंह (कांग्रेस) 125 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ और अमन अरोड़ा (आप) 95 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे नंबर पर हैं। राणा गुरजीत पर अधिकतम 125 करोड़ रुपये, उनके बेटे पर 17.97 करोड़ रुपये, जबकि अरोड़ा पर 22.88 करोड़ रुपये की देनदारी है। राणा इंदर प्रताप सिंह और अरोड़ा पर भी सबसे ज्यादा देनदारी है।नरिंदर सिंह, नरिंदर कौर और लाभ सिंह सबसे गरीब न्यूनतम संपत्ति वाले तीन AAP विधायकों में नरिंदर सिंह सावना (फाजिल्का) की संपत्ति 18,000 रुपये, नरिंदर कौर भारज (संगरूर) और लाभ सिंह उगोके (भदौड़) की संपत्ति 3. 65 लाख रुपये है। लाभ सिंह उगोके ने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में पंजाब के सीएम रहे चरणजीत सिंह चन्नी को भारी मार्जिन से हराया है।

https://webkhabristan.com/najariya/well-planned-strategy-of-kejriwal-and-aam-aadmi-party-became-the-reason-for-vict-7231