ऐतिहासिक जलियांवाला बाग का नया स्वरूप, देखिये तस्वीरों के जरिये



जलियांवाला बाग अब लोगों को नये स्वरुप में देखने को मिलेगा। यहाँ आते ही सबसे पहले सैलानियों का ध्यान एंट्रेंस पर जाने वाला है। यह वही तंग रास्ता है, जहां से जनरल डायर ने सेना को अंदर जाने के लिए कहा था

एंट्रेंस पर हंसते खेलते लोग दिखाई देंगे

एंट्रेंस पर खूबसूरत हंसते-खेलते लोग दिखाए गए हैं। दरवाजा उन शहीदों को समर्पित किया गया है जो 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी वाले दिन हंसते हुए अपने परिवार के साथ जलियांवाला बाग में पहुंचे थे।


शहीदों से संबंधित दस्तावेज में पढ़ सकेंगे वीरता के किस्से

नरसंहार और शहीदों को समर्पित तीन गैलरियों का निर्माण किया गया है। गैलरी में शहीदों से संबंधित दस्तावेज रखे गए हैं ताकि शहीदों को दी जाने वाली यातनाओं और वीरता के किस्से लोग देखें और पढ़ें।


ब्रिटिश राज के क्रूर कामों के बारे में बताया


एक अन्य गैलरी बुलेट मार्क लगी गैलरी के साथ बनाई गई है। यहाँ इस नरसंहार के बाद ब्रिटिश राज में क्या-क्या हुआ और डायर को अंग्रेजों ने कैसे बचाया आदि ब्रिटिश राज के क्रूर कामों के बारे में बताया है।


कुएं की गहराई को देख सकेंगे

जब ये जघन्य हत्याकांड हुआ था, तब कुआं खुला होता था। इंदिरा गांधी के समय रेनोवेट हुए इस पार्क में तब कुएं पर छत बनाई गई थी। लेकिन अब कुएं के चारों ओर गैलरी बनाई है और सुरक्षा के लिए कांच लगाया गया है, ताकि कुएं को गहराई तक देखा जा सकता है।


शहीदी लाट को घंटों बैठे निहारते रह जायेंगे

शहीदी लाट के आसपास सुंदर पार्क बनाया है कि लोग घंटों बैठकर इसकी खूबसूरती को निहार सकते है। लाट के आगे लगे फव्वारों की जगह पानी भरा गया है और उसमें पानी पर तैरने वाले फूल पत्ते लगाए गए हैं।


गोलियों वाली दीवार के आगे लगाई रेलिंग

वो दीवार जिस पर गोलियों के निशान आज भी हैं, ताकि युवा पीढ़ी उस समय मारे गए लोगों के दुख दर्द को समझ सके। इसे संरक्षित करने के लिए दीवार के आगे रेलिंग लगा दी गई है।

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