महिला प्रतिनिधियों की कार्यशाला : पटेल बोलीं- जनप्रतिनिधि के जीवन में अनुशासन जरूरी

महिलाओं को सौंपी गई रूढ़िवादी भूमिकाओं को तोड़ने का समय आ गया

महिलाओं को सौंपी गई रूढ़िवादी भूमिकाओं को तोड़ने का समय आ गया



पटेल ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के जीवन में अनुशासन अत्यंत जरूरी है।

ख़बरिस्तान, धर्मशाला 


राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से नेतृत्व कौशल में सुधार के लिए आयोग के अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम "शी इज ए चेंजमेकर" परियोजना के तहत देश की निर्वाचित महिला विधायकों के लिए धर्मशाला के ट्रांस होटल में तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बुधवार को किया। पटेल ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के जीवन में अनुशासन अत्यंत जरूरी है। इसके साथ ही समाज के प्रत्येक व्यक्ति के प्रभावी विकास को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर पर अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों को सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।     राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि कार्यशाला का आयोजन सशक्त महिला नेतृत्व, सशक्त लोकतंत्र के विचार से किया गया है। उन्होंने कहा कि हर महिला एक नेता है और महिला को नेतृत्व सिखाने की कोई जरूरत नहीं केवल कौशल को निखारने की जरूरत है इसलिए, इस कार्यक्रम की अवधारणा और विकास महिला नेताओं के क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

रूढ़िवादी भूमिका तोड़ने का समय आ गया

     श्रीनिवास आर कटीकिथला, निदेशक एलबीएसएनएए ने महिला शक्ति की वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण की महत्वपूर्णता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सौंपी गई रूढ़िवादी भूमिकाओं को तोड़ने का समय आ गया है और इसके लिए महिलाओं को भी अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला की पहल करने के लिए राष्ट्रीय लिंग और बाल केंद्र, एलबीएसएनएए और राष्ट्रीय महिला आयोग के बीच सार्थक सहयोग के लिए टीम को बधाई दी। वर्कशॉप में उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के 29 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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