जबरन सामूहिक धर्म परिवर्तन करवाया तो 10 साल की होगी सजा



यूपी के मुख्यमंत्री ने 30 अक्तूबर को की थी कानून लाने की घोषणा

लखनऊ@wkउत्तर प्रदेश में सामूहिक धर्म परिवर्तन करवाने पर 10 साल की सजा होगी। जबरन धर्मांतरण के मामले में पांच वर्ष सजा का प्रवाधान होगा। इसमें जमानत भी नहीं होगी। राज्य में जबरन धर्मांतरण के मामलों में सरकार जल्द उप्र विधि विरु द्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अध्यादेश-2020 लाने की तैयारी में है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में कड़ा कानून बनाए जाने की घोषणा की थी। जिसके बाद गृह विभाग ने लव-जिहाद को लेकर अध्यादेश का मसौदा तैयार कर लिया है। गृह विभाग ने कई राज्यों में धर्मांतरण को लेकर लागू कानूनों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की है।

अपराध में होगी कठोर सजा

गृह विभाग ने जो मसौदा तैयार किया है उसमें जबरन या कोई प्रलोभन देकर किसी का धर्म परिवर्तन कराए जाने या विवाह के जरिये एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में रखेगा। नाबालिग लड़की तथा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की महिला के जबरन या विवाह के लिए धर्म परिवर्तन कराए जाने की दशा में और कठोर सजा का प्रावधान होगा।

सामूहिक धर्म परिवर्तन करने में दोषी पाए जाने वाले सामाजिक संगठनों का पंजीकरण रद्द होगा। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में सबूत भी आरोपी को देने होंगे। उन्हें ही साबित करना होगा कि कपटपूर्वक, जबरदस्ती या विवाह के लिए किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कराया गया है। धर्म परिर्वतन के लिए विहित प्राधिकारी के समक्ष यह घोषणा भी करनी होगी।

मसौदे में रखे गए हैं खास प्रावधान

  • जबरन अथवा विवाह के लिए धर्म परिवर्तन के मामले में पांच वर्ष तक की सजा व कम से कम 15 हजार रु पये तक जुर्माना होगा।
  • नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के मामले में कम से कम दो वर्ष तक की तथा अधिकतम सात वर्ष तक की सजा और कम से कम 25 हजार रु पये जुर्माने का प्रावधान होगा।
  • सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में कम से कम दो वर्ष तथा अधिकतम 10 साल की सजा और कम से कम 50 हजार रु पये जुर्माने का प्रावधान होगा।
  • अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के इच्छुक होने पर तय प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को एक माह पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। इसका उल्लघंन करने पर छह माह से तीन वर्ष तक की सजा व कम से कम 10 हजार रु पये जुर्माने का प्रावधान होगा।
  • यदि किसी लड़की का धर्म परिवर्तन एक मात्र प्रयोजन विवाह के लिए किया गया तो विवाह शून्य घोषित किया जा सकेगा।
  • धर्म परिवर्तन पर रोक संबंधी कानून बनाने के लिए राज्य विधि आयोग ने उप्र फ्रीडम आफ रीजनल बिल उपलब्ध कराया है।
  • उप्र फ्रीडम आफ रीजनल बिल से संबंधित कानून बनाने के लिए अध्यादेश का हिंदी व अंग्रेजी भाषा में ड्राफ्ट तैयार कराया गया है।
  • यह अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में होगा और गैर जमानती होगा। अभियोग का विचारण प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में होगा।
  • अध्यादेश के उल्लंघन की दोषी किसी संस्था अथवा संगठन के विरु द्ध भी सजा का प्रावधान होगा। अध्यादेश का उल्लंघन करने वाली संस्था अथवा संगठन को सरकार की ओर से कोई अनुदान अथवा वित्तीय सहायता भी नहीं दी जाएगी।

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