पिता की जायदाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लिया अहम फैसला, इन हालातों में भी मिलेगा बेटी को भी अधिकार



51 पन्नो के फैसले पर बेटियों को भी मिलेगा समान अधिकार

वेब ख़बरिस्तान। अक्सर ये देखने को मिलता है की माता-पिता की जायदाद के लिए उनके बच्चों में आपसी लड़ाई- झगड़ा होता रहता है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिना वसीयत के मरने वाले पिता के वारिस उसकी संपत्ति के समान हकदार होंगे।

बेटी का भी होगा समान अधिकार


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर पिता की इकलौती संतान बेटी है, तो उसे पूरी संपत्ति विरासत में मिलेगी। यहाँ यह स्पष्ट किया गया है  कि पुत्र पर पिता के भाई का कोई अधिकार नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिता की संपत्ति में बेटी का उतना ही अधिकार है जितना कि बेटे का।

पेश किया गया 51 पन्नो का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिता की मृत्यु हो जाने के बाद अगर पिता की वसीयत नही बनी हुई है, तो उस स्थिति में पिता की सारी संपत्ति उनके बच्चों में बराबर बांट दी जाएगी। इस बारे में जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने 51 पन्नों का एक फैसला पेश किया है और कहा कि आदमी को वरीयता देते हुए ऐसी संपत्ति का वारिस होने का हकदार होगा। वहीँ अगर कोई हिंदू महिला बिना वसीयत के मर जाती है, तो उस स्थिति में महिला को पिता या माता से विरासत में मिली संपत्ति उसके पिता के वारिसों के पास जाएगी जबकि उसके पति या ससुर से विरासत में मिली संपत्ति उसके वारिसों को मिलेगी। मद्रास उच्च न्यायालय के मामले को खारिज करने के फैसले के खिलाफ अपील पर यह फैसला आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि विचाराधीन संपत्ति एक पिता की स्व-अर्जित संपत्ति थी, उसकी मृत्यु के बाद परिवार के पुनर्मिलन के बावजूद, उसकी इकलौती संतान को उत्तराधिकार और संपत्ति उत्तरजीविता द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जाएगा।

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