मन की बात में बोले पीएम, टोक्यो ओलिंपिक में तिरंगा देख रोमांचित हुआ देश



प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात के 79वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को किया संबोधित, कहा- भारत जोड़ो अभियान चलाएं; हमें नेशन फर्स्ट, आलवेज फर्स्ट के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है

वेब ख़बरिस्तान, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देशवासियों को संबोधित करते हुए टोक्यो ओलिंपिक गए भारतीय दल का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय ​खिलाड़ियों को तिरंगा लेकर चलते देख मैं ही नहीं पूरा देश रोमांचित हो उठा। पूरे देश ने एक होकर अपने इन योद्धाओं से विजयी भव कहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए देश को संबोधित कर रहे हैं। यह इस प्रोग्राम का 79वां एपिसोड है। मोदी ने कहा,  कल करगिल विजय दिवस भी है। यह भारत की सेना के शौर्य का प्रतीक है। मैं चाहूंगा कि आप करगिल की गाथा जरूर पढ़े। वीरों को नमन करें।


पीएम ने कहा, इस साल देश आजादी के 75वें साल में प्रवेश कर रहा है। ये हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है कि जिस आजादी के लिए देश ने सदियों का इंतजार किया, उसके 75 वर्ष होने के हम साक्षी बन रहे हैं। आपको याद होगा, आजादी के 75 साल मनाने के लिए, 12 मार्च को बापू के साबरमती आश्रम से 'अमृत महोत्सव' की शुरूआत हुई थी। इसी दिन बापू की दांडी यात्रा को भी पुनर्जीवित किया गया था, तब से जम्मू-कश्मीर से लेकर पुडुचेरी तक, गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर तक, देश भर में अमृत महोत्सव से जुड़े कार्यक्रम चल रहे हैं।

कितने ही स्वाधीनता सेनानी और महापुरुष हैं, जिन्हें 'अमृत महोत्सव' में देश याद कर रहा है। सरकार और सामाजिक संगठनों की तरफ से भी लगातार इससे जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक आयोजन इस बार 15 अगस्त को होने जा रहा है, ये एक प्रयास है - राष्ट्रगान - से जुड़ा हुआ। सांस्कृतिक मंत्रालय की कोशिश है कि इस दिन ज्यादा से ज्यादा भारतवासी मिलकर राष्ट्रगान गाएं, इसके लिए एक वेबसाइट भी बनाई गई है - rashtragaan.inइसकी मदद से आप राष्ट्रगान गाकर,  उसे रिकॉर्ड कर पाएंगे, इस अभियान से जुड़ पाएंगे। मुझे उम्मीद है, आप इस अनोखी पहल से जरूर जुड़ेंगे।

वोकल फॉर लोकल का नारा दोहराया

रोज के कामकाज करते हुए भी हम राष्ट्र निर्माण कर सकते हैं, जैसे वोकल फॉर लोकल। हमारे देश के स्थानीय उद्यमियों, आर्टिस्टों, शिल्पकारों, बुनकरों को सपोर्ट करना, हमारे सहज स्वभाव में होना चाहिए। 7 अगस्त को आने वाला नेशनल हैंडलूम डे, एक ऐसा अवसर है जब हम प्रयास पूर्वक भी ये काम कर सकते हैं। इस दिन के साथ बहुत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जुड़ी हुई है। इसी दिन, 1905 में स्वदेशी आंदोलन की शुरूआत हुई थी। हमारे देश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में हैंडलूम कमाई का बहुत बड़ा साधन है। ये ऐसा क्षेत्र है जिससे लाखों महिलाएं, लाखों बुनकर, लाखों शिल्पी जुड़े हुए हैं । आपके छोटे-छोटे प्रयास, बुनकरों में एक नई उम्मीद जगाएँगे। आप स्वयं कुछ-न-कुछ खरीदें, और अपनी बात दूसरों को भी बताएं और जब हम आजादी के 75 साल मना रहे हैं, तब तो, इतना करना हमारी जिम्मेवारी बनती ही है भाइयो।

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