किडनी पेशेंट को लेकर ई-रिक्शा पर अस्पतालों में भटकती रही मां, बेटे ने गोद में दम तोड़ा



कहां गई इंसानियतः एंबुलेंस वाले ने लिया पांच हजार, मौत के बाद विनीत का फोन और पर्स भी गायब

वेब खबरिस्तान, वाराणसी : किडनी मरीज को कोरोना के कारण किसी भी अस्पताल ने दाखिल नहीं किया और मरीज ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। मां बेटे को ई-रिक्शा पर लेकर कई अस्पतालों में भटकी पर इलाज नहीं मिला। चार साल पहले बड़े भाई की भी किडनी रोग के कारण मौत हो गई थी।

मामला उत्तर प्रदेश के वाराणसी का है। यहां एक मां अपने बेटे विनीत सिंह (जो कि किडनी का मरीज है) को लेकर कई अस्पतालों में भटकती रही लेकिन कोरोना के कारण किसी भी अस्पताल ने उसे दाखिल नहीं किया। मां चंद्रकला ने दर्द से कराह रहे बेटे को लेकर वाराणसी के अस्पतालों में भटकने के बाद कलेजे के टुकड़े को अपनी गोद में मरते हुए देखा। चंद्रकला ने कहा, जाने ईश्वर किस गुनाह की इतनी बड़ी सजा दे रहे है।


शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक ने चंद्रकला से 60 किमी की दूरी के पांच हजार रुपए मांगे। मजबूर मां को आखिरकार इतना किराया देना पड़ा। रामघाट पर देर शाम विनीत का अंतिम संस्कार हुआ। पार्थिव शरीर ई-रिक्शा से एंबुलेंस पर रखने और घर तक पहुंचाने के बीच विनीत का मोबाइल फोन व पर्स भी किसी ने चुरा लिया।

मुंबई में करते थे काम

चंद्रकला के पति विनोद कुमार सिंह दस साल पहले पांच बच्चों धर्मेंद्र, संदीप, कविता, विनीत व सुनीत और पत्नी को छोड़कर परलोक सिधार गए। धर्मेंद्र और संदीप को मुंबई की दवा कंपनी में काम मिल गया। उन्होंने छोटे भाई विनीत व सुनीत को भी बुलाकर दूसरी दवा कंपनी में काम दिला दिया। चार साल पहले किडनी की बीमारी से संदीप की मौत हो गई। संदीप की एक बेटी है।

बीएचयू में करा रहे थे इलाज

किडनी के कारण संदीप के बाद अविवाहित विनीत की भी मौत हो गई है। विनीत का इलाज मुंबई में चल रहा था। पिछले साल दिसंबर में सबसे छोटे भाई सुनीत की शादी में घर आए तो बीएचयू में इलाज करवाने लगे। बीएचयू में सोमवार को डाक्टर ने विनीत को बुलाया था, लेकिन जब वहां पहुंचे तो उन्होंने देखने से मना कर दिया। इसके बाद मां विनीत को ई-रिक्शा से ककरमत्ता स्थित निजी अस्पताल ले गईं, लेकिन इलाज नहीं मिला। लौटते वक्त ई-रिक्शा में ही विनीत की मौत हो गई।

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