कर्नाटक के नये मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने दिलाई शपथ



राजभवन में राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने ही बोम्मई के नाम का प्रस्ताव रखा था।

वेब खबरिस्तान। बसवराज बोम्मई कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री  बन गए हैं। राजभवन में राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने ही बोम्मई के नाम का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।

संसदीय मामलों के मंत्री रहे बोम्मई

28 जनवरी 1960 को जन्मे बसवराज सोमप्पा बोम्मई मुख्मंत्री बनने से पहले कर्नाटक के गृह, कानून, संसदीय मामलों के मंत्री भी थे। उनके पिता एसआर बोम्मई भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बोम्मई ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की है और उन्होंने जनता दल के साथ राजनीति की शुरुआत की थी। वे धारवाड़ से दो बार 1998 और 2004 में कर्नाटक विधान परिषद के लिए चुने गए। साल 2008 में जनता दल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। उसी दौरान हावेरी जिले के शिगगांव से विधायक चुने गए।

राज्य में कई सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू किये


इंजीनियरिंग और खेती से जुड़े होने के नाते बोम्मई को कर्नाटक के सिंचाई मामलों का जानकार माना जाता है। उन्होंने राज्य में कई सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू करवाए जिस वजह से उन्हें सराहा जाता है। अपने  विधानसभा क्षेत्र में भारत की पहली 100% पाइप सिंचाई परियोजना लागू करने का श्रेय भी उनको दिया जाता है।

येदियुरप्पा के चहेते हैं बोम्मई

बसवराज बोम्मई येदियुरप्पा के चहेते हैं और उनके शिष्य हैं। येदियुरप्पा ने इस्तीफा देने से पहले ही बोम्मई का नाम भाजपा आलाकमान को सुझा दिया था। दरअसल, लिंगायत समुदाय के मठाधीशों के साथ हुई बैठक में येदियुरप्पा ने इस नाम को उन सबके बीच रखा था। लिंगेश्वर मंदिर के मठाधीश शरन बसवलिंग ने बताया अगर येदियुरप्पा एक इशारा करते, तो पूरा समुदाय उनके लिए भाजपा के विरोध में उतर आता। चुनाव में भाजपा को मुंह की खानी पड़ती, लेकिन येदियुरप्पा ने बसवराज बोम्मई की हिमायत की। लिंगायत समुदाय का होने के कारण उनके नाम पर सभी मठाधीश जल्दी राजी हो गए।

बोम्मई की संघ से नजदीकी भी उनके पक्ष में

बोम्मई के अलावा मुर्गेश निरानी और अरविंद बल्लाड के नाम भी चर्चा में थे। तीनों ही लिंगायत समुदाय से आते हैं, लेकिन बसवराज बोम्मई येदियुरप्पा के करीबी ही नहीं, उनके शिष्य भी माने जाते हैं। इसके अलावा वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी नजदीक हैं। माना जाता है कि संघ और येदियुरप्पा के बीच की कड़ी के रूप में इन्होंने ही काम किया। येदियुरप्पा से संघ के बिगड़े रिश्तों का असर येदियुरप्पा के कामकाज पर न पड़े, इसमें बोम्मई ने बड़ी भूमिका निभाई।

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