ऊना में रजिस्टर्ड हुई किसानों की पहली कंपनी



कृषि कानून बनने के बाद किसान अब प्राइवेट लिमिटेड फर्म बन गए हैं

ऊना@wkनए कृषि कानून लागू होने के बाद ऊना जिले में प्रदेश के किसानों की पहली कंपनी रजिस्टर्ड हुई है। इसे कंपनी एक्ट 1956 के तहत पंजीकृत किया गया है। कृषि कानूनों में प्रावधान है कि किसान बड़ी कंपनियों के साथ व्यापार कर सकते हैं और उनके मुकाबले में बाजार में उत्पाद बेच भी सकते हैं। इसके लिए किसानों को लिमिटेड फर्म बनाने की जरूरत है।

एग्रो आर्गेनिक फार्मर कंपनी लिमिटेड रजिस्टर्ड करवाने वाले ऊना जिले के पंजावर के किसान अनिल राणा हैं। यह कंपनी भारत सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पंजीकृत हुई है। मछली पालक किसान राणा कहते हैं कि ‘मेरी कोशिश है जिले के सभी किसान कंपनी से जुड़कर बड़ी कंपनियों से मुकाबला करें। इसमें भारत सरकार भी सहयोग कर रही है।’

पहली कंपनी में 10 लोगों का शेयर


इसमें दस लोगों का शेयर है। कंपनी जिले के हर गांव में छोटे किसान सहायता समूह बनाएगी। इसमें सभी किसान जुड़ सकते हैं। इन समूह में से दो सदस्य एग्जीक्यूटिव बॉडी के मेंबर होंगे और ये बोर्ड आॅफ डायरेक्टर का चयन करेंगे। कंपनी में पांच से 15 तक डायरेक्टर हो सकते हैं।

किसानों का बराबर लाभ प्रतिशत

केंद्र सरकार के लघु कृषि व्यापार संघ के सौजन्य से एफपीओ (किसान उत्पादक संघ) बनाकर कंपनी की शक्ल देकर कंपनी एक्ट में रजिस्टर्ड करवाना होगा। कंपनी दस लोग शुरू कर सकते हैं और अधिकतम 300 किसान इससे जुड़ सकते हैं। इसमें सभी किसानों का बराबर का लाभ प्रतिशत होगा। कंपनी में किसान का हिस्सा चाहे कितना ही क्यों न हो।

नहीं देनी होगी कोई फीस

सरकार के निर्देश पर कंपनी किसानों को नि:शुल्क जोड़ेगी। किसानों के उत्पाद खरीदेगी। जिसके लिए पांच साल तक का अनुबंध हो सकता है। किसानों के उत्पाद का दाम पहले से तय होगा। लेकिन किसान को पांच साल तक उत्पाद बेचने के लिए कहीं और नहीं जाना होगा। किसान समूह बनाकर एक ही फसल की खेती कर सकते हैं। उदाहरण के लिए कंपनी मछली का अचार बनाती है तो उसमें प्रयोग होने वाले मसालों का उत्पादन किसान करेंगे और कंपनी फसल खरीदेगी।

सरकार देगी 15 लाख तक की आर्थिक सहायता

रजिस्टर्ड कंपनियों को सरकार 15 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता भी देगी। 300 किसानों वाली कंपनी को यह सहायता मिलेगी। लाभांश किसानों में बराबर बांटा जाएगा। कंपनी के स्टाफ का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी। इसके लिए सरकार ने एक एजेंसी से अनुबंध किया है, जो शुरु आती रूप में कंपनी का संचालन करेगी। किसानों को कंपनी के संचालन के लिए बिना किसी बैंक गारंटी ऋण भी मिलेगा।

मंत्री बोले- किसानों को मिलेगा लाभ

कृषि व पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर कहते हैं कि कृषि कानूनों का लाभ किसानों को मिलेगा, इसका प्रमाण है ऊना में प्रदेश की पहली कंपनी पंजीकृत होना। फिलहाल यह कंपनी मत्स्य कृषकों के लिए है। जल्द ही खाद्य कृषि से जुड़े अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिलने लगेगा। अब छोटे से गांव का किसान भी उत्पाद को बड़ी कंपनी से मुकाबले के लिए तैयार कर सकता है।

Related Links