50 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण करने वाला इंजीनियर अरेस्ट

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सीबीआई दिल्ली की विशेष यूनिट ने बांदा से पकड़ा, मोबाइल व नकदी बरामद

लखनऊ@wk5 से 16 साल के बच्चों का लगातार अपहरण हो रहा था। उनकी पोर्न वीडियो बनाई जाती। उस वीडियो को उसे डार्क वेब पर महंगे दामों पर बेचा जाता। फिर बच्चों को मौत के घाट उतार दिया जाता। यह सिलसिला लगातार 10 साल से चल रहा था। 50 से ज्यादा बच्चों को यौन शोषण के बाद मौत के घाट उतरने वाले सनकी को उत्तर प्रदेश के बांदा से सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। यह करतूत सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर राम भवन की है।

जोकि चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात था। यूपी के जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह ने इसमें कड़ा संज्ञान लिया। उनके आदेश पर सिंचाई विभाग में सिविल इंजीनियर के पद पर तैनात राम भवन को निलंबित कर दिया गया है। चाइल्ड पोर्नाेग्राफी की आॅनलाइन मानीटरिंग के लिए गठित सीबीआई दिल्ली ने गहन छानबीन के बाद आरोपी को बांदा से गिरफ्तार किया। क्योंकि डार्क वेब का पता लगाना मुश्किल है। एक अन्य साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि डार्क वेब पर क्रिएट की गई वेबसाइट सर्च इंजन में नजर नहीं आती हैं। डार्क वेब को डीपनेट भी कहते हैं।

सेक्स ट्वाय बरामद


राम भवन के चित्रकूट में बने घर से सीबीआई ने सेक्स ट्वाय बरामद किए हैं। जिसके अलावा वहां से आठ लाख रु पए, कई मोबाइल फोन, बेव कैमरा, लैपटाप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण भी बरामद किए गए हैं।

सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ ने बताया कि 40 साल के राम भवन 10 साल से चित्रकूट में तैनात था। वह 5 से 16 साल के बच्चों को जाल में फंसाता था और यौन शोषण करता था। ज्यादातर बच्चे चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और आसपास के इलाके के थे। वह बच्चों का यौन शोषण करने के दौरान उनकी मोबाइल व लैपटाप से अश्लील वीडियो बनाता था। फिर इस वीडियो को डार्क वेब पर बेचता था।

बच्चों को देता था महंगे मोबाइल

राम भवन वीडियो बनाने के बाद बच्चों को मुंह बंद रखने लिए मनाता था। जिसके लिए बच्चों को महंगे मोबाइल व उपहार देता था। 15 दिन पूर्व सीबीआई दिल्ली ने आॅनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी की गतिविधियों के आधार पर केस दर्ज किया था। जांच में उन्होंने राम भवन की भूमिका पाई। कुछ और आरोपियों की भी पहचान की जा रही है। उन पर जल्द शिकंजा कसने की तैयारी है।

डार्कवेब की परतें जटिल

आइपीएस अधिकारी डा. अरविंद चतुर्वेदी बताते हैं कि कई परतें होने के कारण डार्कवेब बेहद जटिल नेटवर्क हैं। डेनमार्क, कनाडा, स्वीडन, आयरलैंड समेत अन्य देशों में इसे संचालित किया जाता है। इन वर्चुअल सर्वर के आइपी (इंटरनेट प्रोटोकाल) एड्रेस को ट्रेस करना आसान नहीं होता है। यही वजह है कि अपराधी अब मादक पदार्थों, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अवैध असलहों की खरीद-फरोख्त तक डार्कनेट से चलाते हैं।

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