कांगड़ा District में भाजपा की सियासी व्यूहरचना, किला मजबूत करने में जुटे नड्डा-जयराम

जिला कांगड़ा पर भाजपा ने चुनावी साल में पूरा फोकस कर दिया है

जिला कांगड़ा पर भाजपा ने चुनावी साल में पूरा फोकस कर दिया है



- सर्वे में कमज़ोर रिपोर्ट के बाद सबसे बड़े जिले पर फोकस, नड्डा का एक माह में दूसरा दौरा

सौरभ कुमार, धर्मशाला प्रदेश की सत्ता तक पहुंचाने वाले सबसे बड़े जिला कांगड़ा पर भाजपा ने चुनावी साल में पूरा फोकस कर दिया है। 22 अप्रैल को कांगड़ा में रोड शो करने के ठीक 20 दिन बाद 13 मई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भाजयुमो के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के साथ सियासी व्यूहरचना को धार देने पुनः कांगड़ा के धर्मशाला पहुंचे। गगल से शीला चौक तक सियासी रथयात्रा के जरिये कार्यकर्ताओं में जोश भरा। पूरे कार्यक्रम में नड्डा के साथ हिमाचल के सीएम जयराम की भाव भंगिमा आत्मविश्वास से लबरेज़ दिखी।  नड्डा ने बीते 20 दिन के अंदर दूसरी बार कांगड़ा में मोर्चा संभाला है। सबसे बड़े जिले की अहमियत समझते हुए पार्टी ने 15 मई तक चलने वाले भाजयुमो का राष्ट्रीय अभ्यास वर्ग कुल्लू से धर्मशाला शिफ्ट किया। 

जून में मोदी के धर्मशाला दौरे की योजना

भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व जानता है कि मिशन रिपीट तभी कामयाब होगा, जब कांगड़ा का सियासी किला अभेद्य रहेगा। सूत्र बताते हैं कि नड्डा के बाद अगले माह खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य सचिवों की नेशनल मीटिंग के लिए 2 दिन धर्मशाला पहुंच कर हिमाचल की सियासी फीडबैक भी ले सकते हैं। मोदी 90 के दशक में हिमाचल प्रभारी रहे हैं व हिमाचल के चप्पे चप्पे से वाकिफ हैं।

कांगड़ा पर मेहरबान जयराम 


4 साल के कार्यकाल में बीजेपी सरकार पर जिला कांगड़ा से भेदभाव के आरोप विपक्ष लगातार लगाता आ रहा है। चुनावी साल में विपक्ष को काउंटर करने के लिए सीएम जयराम कांगड़ा के हर विधानसभा में दस्तक देकर जनता व कार्यकर्ताओं से रूबरू हो रहे हैं। बीते एक महीने में जयराम ने 12 दिन कांगड़ा के 8 विधानसभा हलकों सुलह, नगरोटा बगवां, पालमपुर, इंदौरा, शाहपुर, ज्वालामुखी, ज्वाली व धर्मशाला के दौरे कर करीब 700 करोड़ की डिवेलपमेंट स्कीमें शुरू या शिलान्यास किये हैं। 17 अप्रैल को सीएम अपने अति करीबी मंत्री बिक्रम ठाकुर के हलके जसवां परागपुर में करोड़ों की योजनाओं को लोकार्पित करेंगे। 

कांगड़ा इसलिए बीजेपी की  प्राथमिकता में

सियासी सूत्र बताते हैं कि भाजपा आलाकमान की ओर से हाल ही में जिला कांगड़ा में करवाए गए 2 अलग अलग सर्वे की रिपोर्ट में जिले के कुछ विधायकों का रिपोर्ट कार्ड अपेक्षा से कमतर पाया गया है। सर्वे रिपोर्ट पर गौर करने के बाद आलाकमान ने कांगड़ा में समय रहते डैमेज कंट्रोल का जिम्मा सीएम को सौंपा है। रिपोर्ट की भनक लगने के बाद जिले के मंत्री व विधायक अपने अपने हलकों में डटे हैं।

कांगड़ा है सत्ता का Door, पर 3 दशक से सिंहासन है दूर

प्रदेश में कांगड़ा की अहमियत की गवाही चुनावी आंकड़े भी देते हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने सत्ता में वापसी कांगड़ा की 15 में से 11 विधानसभा सीटों पर फतह हासिल करके की। 2012 के चुनावों में कांग्रेस ने 16 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता सुख पाया था। सबसे बड़ा जिला होने के बावजूद कांगड़ा जिले से सिर्फ 2 दफा भाजपा दिग्गज शांता कुमार सीएम बने हैं, लेकिन परिस्थिति वश वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कांगड़ा को खासी अहमियत देते थे। धर्मशाला के तपोवन में विधानसभा भवन व शीतकालीन प्रवास की परम्परा उनकी ही देन है।  

कांग्रेस ने कांगड़ा में उभारी New Leadership

कांग्रेस आलाकमान ने ओबीसी लीडर व कांगड़ा से विधायक पवन काजल को कार्यकारी अध्यक्ष, चौधरी चन्द्र कुमार को संचालन समिति में लेकर एक तीर से 2 निशाने साधे हैं। ओबीसी समुदाय को साधने के साथ ही नए नेतृत्व को उभार गुटबंदी में उलझे नेताओं को कड़ा संदेश दिया है। प्रदेश टीम में जिले से 7 नेताओं को शामिल कर संतुलन बनाया है। काजल ने कहा कि उनका पूरा फोकस जिले में पार्टी को मजबूत कर भाजपा सरकार की नाकामियों को उजागर करने पर है। 

Aap ने भी 15 सीटों पर गड़ा रखी हैं नज़रें 

आम आदमी पार्टी ने शुरुआत से अपना फोकस जिला कांगड़ा पर किया हुआ है। मंडी के बाद कांगड़ा में अपने सर्वोच्च नेता केजरीवाल की रैली भी तय रणनीति के तहत रखी। पंजाब के आप विधायकों की  सीमावर्ती विधानसभा हलकों में लगाई है। प्रदेश प्रभारी सत्येंद्र जैन व अन्य नेता  लगातार जिले में कैम्प कर रहे हैं। प्रवक्ता पंकज पंडित ने कहा कि कांगड़ा में आप की पंजाब में जीत का असर दिख रहा है।

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