अर्नब गोस्वामी को मिली अंतरिम जमानत

Arnab-Goswami

Arnab-Goswami



बांबे हाई कोर्ट ने नहीं किया न्याय : सुप्रीम कोर्ट

वेब डेस्क @wkसुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के दो साल पुराने मामले में रिपब्लिक टीवी के चीफ एडीटर अर्नब गोस्वामी को बुधवार अंतरिम जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने बांबे हाई कोर्ट और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने मामले में न्याय नहीं किया। अगर व्यक्तिगत आजादी पर बंदिशें लगाई जाती हैं तो ये न्याय का मजाक होगा।


जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की दो सदस्यीय अवकाशालीन पीठ ने गोस्वामी के साथ ही मामले में दो अन्य आरोपितों नीतीश सारदा और फिरोज मुहम्मद शेख को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बांड पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत बांड को तलोजा जेल के अधीक्षक के सामने प्रस्तुत किया जाए। देर शाम अर्नब गोस्वामी तलोजा जेल से बाहर भी आ गए। पीठ ने आरोपियों से कहा कि वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच में सहयोग करेंगे।

दिन भर चली सुनवाई

दिन भर चली सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि अगर राज्य सरकारें लोगों को निशाना बनाती हैं तो उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शीर्ष अदालत मौजूद है। अर्नब गोस्वामी मामले का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि अगर इस तरह से व्यक्तिगत आजादी को खत्म किया जाता है तो यह न्याय का मजाक होगा। अदालत ने राज्य सरकारों द्वारा विचारधारा और मत भिन्नता के आधार पर लोगों को निशाना बनाने पर भी चिंता जताई। पीठ ने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि एक के बाद एक ऐसे मामले हैं जिसमें हाई कोर्ट जमानत नहीं दे रहे हैं और वे लोगों की निजी स्वतंत्रता की रक्षा करने में नाकाम हो रहे हैं।

दो साल पुराना है मामला

अर्नब गोस्वामी समेत तीनों लोगों को रायगढ़ की अलीबाग पुलिस ने 2018 में इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नायक और उनकी मां की आत्महत्या के मामले में उकसाने के आरोप में चार नवंबर को गिरफ्तार किया था। बांबे हाई कोर्ट ने नौ नवंबर को इन्हें जमानत नहीं दी थी और निचली अदालत में जाने को कहा था। अर्नब गोस्वामी ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

Related Links