नहीं रहे गजोधर भैया यानि राजू श्रीवास्तव, 42 दिन लड़ी मौत से जंग



58 साल की उम्र में ली आखिरी सांस, सबको हंसाने वाले राजू सबको रुलाकर इस दुनिया से चले गए

खबरिस्तान नेटवर्क: बता दें कि मुंबई जैसी मायानगरी में हर कोई बड़े बड़े सपने लेकर आता है सपनों के इस शहर में राजू श्रीवास्तव भी पहुंचे और अपनी लाइफ को चलाने के लिए ऑटो ड्राईवर बने फिर एक दिन ऑटो चलाते वक्त ही राजू श्रीवास्तव की किस्मत चमकी और उन्हें एक कॉमेडी शो के लिए ब्रेक मिला इसके बाद राजू श्रीवास्तव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा जिसके तहत राजू ने डीडी नेशनल के मशहूर शो टी टाइम मनोरंजन से लेकर द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज तक अपनी खास पहचान बनाई द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज में राजू श्रीवास्तव उपविजेता रहे और इसी शो में उन्होंने अपना गजोधर भैय्या अवतार दिखाया, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया यही से शुरुआत हुई गजोधर भैय्या बनने की कहानी यूं तो राजू स्टैंड अप कॉमेडी करते आ रहे थे लेकिन उन्हें तो आगे अपनी मंजिल की ओर बढ़ना था। राजू ने तीन दशकों तक फिल्मों में भी बहुत से कॉमेडी रोल निभाए।

महज 50 रूपए के लिए किया काम 

यहां आपको बता दें कि राजू ने अपने करियर के शुरूआती दौर में महज 50 रूपए के लिए भी काम किया है ये उस वक्त की बात है जब मुंबई में कॉमेडियन को ज्यादा तवज्जों नहीं दी जाती थी सिर्फ जॉनी लिवर साहब ऐसे थे, जिन्हें देखकर उन्हें साहस मिलता था


मिडिल क्लास फॅमिली से करते थे बिलोंग 

कानपुर की एक मिडिल क्लास फैमिली में जन्मे राजू को बचपन में सत्य प्रकाश नाम से बुलाया जाता था जो आगे जाकर राजू श्रीवास्तव बन गए। इनके पिता रमेश चंद्र श्रीवास्तव एक सरकारी कर्मचारी थे और शौकिया तौर पर कविताएं लिखा करते थे। छुट्टियों में पिता कवि सम्मेलन का हिस्सा बना करते थे, जिन्हें बलाई काका नाम से पहचाना जाता था। पिता से राजू को भी लोगों का मनोरंजन करने का गुर विरासत में मिला। बचपन से ही राजू घर आए मेहमानों के सामने मिमिक्री करते और स्कूल में टीचर की भी नकल उतारकर लोगों को खूब हंसाते। कई टीचर उन्हें बद्तमीज कहते हुए सजा देते थे, लेकिन एक टीचर ऐसे भी थे जिन्होंने राजू को बढ़ावा दिया और कॉमेडी में करियर बनाने की सलाह दी। लोगों ने राजू को लोकल क्रिकेट मैच में कमेंट्री करने की सलाह दी। इससे ये अपने हुनर को कॉन्फिडेंट के साथ लोगों के सामने पेश करने लगे। ये बचपन से ही कॉमेडियन बनना चाहते थे, लेकिन असल में इनकी प्रेरणा अमिताभ बच्चन थे। बिग बी की फिल्म दीवार देखने के बाद राजू ने एक्टर बनने का फैसला किया और मुंबई चले आये।

भले ही आज वो हमारे बीच में नहीं है, लेकिन उनकी उनकी कॉमेडी हमेशा लोगों को गुदगुदाती रहेगी।

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